Hydrogen Fuel Train Engine: ट्रेनों में आपने खूब सफर किया होगा! ट्रेन के इंजर पर भी आपने गौर किया होगा! आपने 2 तरह के इंजन देखे होंगे! पहला- डीजल इंजन और दूसरा इलेक्ट्रिक इंजन. डीजल इंजन और इले​क्ट्रिक इंजन के कारण ही कई रूट्स में जो पैसेंजर ट्रेनों को डीएमयू (DMU) और ईएमयू (EMU) कहा जाता है. यह दो तरह के इंजन देशभर में ट्रेनों को खींचते हैं. लेकिन जल्द ही इसमें बड़ा बदलाव ​दिखने वाला है.

जी हां! भारतीय रेलवे (Indian Railways) की ओर से अब ट्रेनों को हाइड्रोजन फ्यूल (Hydrogen Fuel) से चलाने की तैयारी की जा रही है. देश की पहली हाइड्रोजन फ्यूल इंजन वाली ट्रेन हरियाणा के सोनीपत-जींद सेक्शन (Sonipat-Jind Section) पर चलाई जाएगी. इस रेलखंड/सेक्शन की लंबाई 89 किलोमीटर है.

जीरो कार्बन उत्सर्जन मिशन के तहत हो रहा काम

उत्तर रेलवे (Northern Railways) की ओर से सोनीपत-जींद सेक्शन पर हाइड्रोजन फ्यूल इंजन वाली ट्रेन को चलाने के लिए रेलवे ने टेंडर प्रक्रिया शुरू कर दी है. भारतीय रेल वैकल्पिक ईंधन संगठन (IROAF) की ओर से इसके लिए टेंडर जारी किया गया है. रेलवे की ओर से जीरो कार्बन उत्सर्जन मिशन के तहत इस योजना को जल्द से जल्द अमल में लाने पर काम किया जा रहा है.

उत्तर रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी (CPRO) दीपक कुमार के मुताबिक भारतीय रेलवे ने स्वयं को हरित परिवहन प्रणाली के रूप में बदलने पर काम कर रहा है. इसी क्रम में नॉर्दन रेलवे (Northern Railway) के 89 किलोमीटर लंबे सोनीपत-जिंद सेक्शन पर देश की पहली हाइड्रोजन फ्यूल ट्रेन चलाने का निर्णय लिया है.

5 ​अक्टूबर को फाइनल होगा टेंडर

भारतीय रेल वैकल्पिक ईंधन संगठन (IROAF) भारतीय रेल के हरित ईंधन प्रभाग ने नॉर्दन रेलवे के सोनीपत-जिंद सेक्शन पर हाइड्रोजन फ्यूल सेल आधारित ट्रेन चलाने के लिए निविदाएं आमंत्रित की हैं. इस प्रयोजन के लिए टेंडर फाइनल होने से पहले क्रमशः 17 अगस्त और 09 सितंबर को दो बैठकें निर्धारित की गई हैं. इसके लिए प्रस्ताव देने की तारीख 21 सितंबर और टेंडर खुलने की तारीख 05 अक्टूबर निर्धारित की गई है.

ग्रीन हाउस गैसेज को लेकर समझौता

पेरिस वातावरण समझौता 2015 के अंतर्गत ग्रीन हाउस गैसेज को कम करने के लक्ष्य की प्राप्ति की चुनौती को स्वीकार करते हुए और रेलवे द्वारा जीरो कार्बन उत्सर्जन मिशन के अंतर्गत 2030 तक लक्ष्य को प्राप्त करने का प्रयास है.

रेलवे ने सोनीपत-जिंद सेक्शन पर 2 डीएमयू रैक को फ्यूल सेल पावर्ड हाइब्रिड ट्रैक्शन सिस्टम से ट्रेन चलाने का निश्चय किया है. इसमें हाइड्रोजन फ्यूल आधारित ट्रेन का संचालन किया जाएगा और इसके लिए आवश्यक बजटीय सहायता उपलब्ध कराई गई है.

सालाना 2.3 करोड़ रुपये बचेंगे

रेलवे की ओर से बताया गया है कि डीजल से चलने वाली डेमू को हाइड्रोजन सेल तकनीक में बदलने से सालाना 2.3 करोड़ रुपये बचेंगे. यही नहीं, बल्कि हर साल 11.12 किलो टन कार्बन फुटप्रिंट (NO2) और 0.72 किलो टन पर्टिकुलेट मैटर का उत्सर्जन भी रुकेगा. रेलवे की यह योजना महत्वाकांक्षी बताई जा रही है. इस सेक्शन में प्रोजेक्ट सफल होने के बाद देश की अन्य रूट्स पर भी इसे अपनाया जाएगा.